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76 वर्ष के बुजुर्ग ने जीती गले के कैंसर (लिम्फोमा) से जंग: जानिए लक्षण, जांच और आयुष्मान भारत योजना से इलाज की कहानी
28 Sep 2026

76 वर्ष के बुजुर्ग ने जीती गले के कैंसर (लिम्फोमा) से जंग: जानिए लक्षण, जांच और आयुष्मान भारत योजना से इलाज की कहानी

लिम्फोमा कैंसर के लक्षण और इलाज: 76 वर्षीय बुजुर्ग की सफलता की कहानी

एक 76 साल के बाबा हमारे पास आए। वह खाना नहीं खा पा रहे थे और उन्हें कुछ भी पीने में भी दिक्कत हो रही थी। उनके गले तथा बगल (कांख) में गांठें थीं। जैसा कि वह बता रहे थे, गांठ हलक में फंसी हुई प्रतीत होती थी, सांस लेने में परेशानी हो रही थी और पानी भी नहीं पिया जा रहा था।

आमतौर पर मुंह और गले के कैंसर के मरीजों में दांत के बगल में गांठ, छाला, मुंह न खुल पाना, दर्द होना, कान में दर्द, कमजोरी, और भूख लगने के बावजूद खाने-पीने में गंभीर परेशानी देखी जाती है। इसके अलावा जीभ के पिछले हिस्से में सूजन, निगलने में तकलीफ, और गले में ऐसी सख्त गांठें होना जो हिलती नहीं हैं, काफी आम हैं।

एक और तरह के मरीज होते हैं जिन्हें खाना निगलने में तकलीफ होती है। शुरुआत में सख्त खाना खाने में दिक्कत होती है, लेकिन धीरे-धीरे पानी पीना भी मुश्किल हो जाता है। दर्द और पोषण की कमी से मरीज बेहद कमजोर हो जाता है और केवल पतला सत्तू, दलिया, दाल का पानी या चावल का मांड ही ले पाता है।

पर हमारे इस मरीज के लक्षण थोड़े अलग थे। उन्हें रुकावट जैसा अहसास अधिक था और मुंह सूखता रहता था। वह किसी तरह पानी घूंट-घूंट कर पी पा रहे थे। मुंह के अंदर देखने पर ऐसा लग रहा था मानो जल्दी खाने के चक्कर में कोई बड़ा आलू हलक में अटक गया हो और पानी किनारे से रिस-रिस कर धीरे-धीरे नीचे जा रहा हो।

मेरी इच्छा थी कि मरीज को तुरंत पोषण देने के लिए नाक के रास्ते पेट में नली (Nasogastric Tube) डाल दी जाए, पर मरीज इसके लिए कतई तैयार नहीं थे। उनका कहना था, "खाने-पीने में कोई खास दिक्कत नहीं है, फिर नली क्यों डालेंगे?" मरीज को नली डलवाने को लेकर एक सामाजिक संकोच व डर (Social Taboo) महसूस हो रहा था।

जांच के क्रम में सी.टी. स्कैन (CT Scan) और बायोप्सी (Biopsy) कराई गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्हें लिम्फोमा (Lymphoma) है।

उम्र 76 वर्ष होने के कारण हमें चिंता थी कि कीमोथेरेपी (Chemotherapy) का दुष्प्रभाव कहीं उनकी कमजोरी या बीमारी को और न बढ़ा दे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा उपचार शुरू किया गया। इलाज का उन पर बहुत सकारात्मक असर हुआ और वह पूरी तरह ऊर्जावान रहने लगे। अब वह हर बार अपने अलग-अलग पोतों के साथ ओपीडी आते हैं।

आज उनकी चौथी साइकिल की कीमोथेरेपी चल रही है। गले और बगल की सभी गांठें पूरी तरह गायब हो चुकी हैं और बाबा आज बेहद खुश व स्वस्थ हैं।

समय: सोमवार से शनिवार | शाम 5:30 बजे से रात 8:00 बजे तक

पता: 6, 25, 26, 27, वसुंधरा कॉम्प्लेक्स, ईज़ी डे के पीछे, मुंशी पुलिया चौराहा, इंदिरा नगर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश 226016

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