रेडियोथेरेपी से डर और कैंसर का सही इलाज: दो मरीजों की केस स्टडी
रेडियोथेरेपी से डर और कैंसर का सही इलाज: दो मरीजों की केस स्टडी
हमने देखा है कि मरीज सिकाई या विकिरण चिकित्सा (रेडियोथेरेपी - Radiotherapy) से बहुत डरते हैं, जिन्हें इधर-उधर की सुनी-सुनाई बातें पता चल जाती हैं—जैसे "गाँव में फलां व्यक्ति को हुआ था, फलां व्यक्ति को यह सिकाई वाला इलाज हुआ था, वह नहीं बचा", "नहीं करवाऊँगा साहब, छाले बहुत ज़्यादा पड़ जाते हैं।"
मतलब यदि कैंसर अत्यधिक advanced stage में हो तो इलाज का असर कम होता है, पर लोग यह समझ लेते हैं कि "इलाज से ही गाल में छेद हो गया।" खैर, ये दोनों मरीज कुछ अलग प्रकार के थे, पर सिकाई (रेडियोथेरेपी) के विरोधी थे।
पहली एक महिला मरीज थीं, जिनको खाना और पानी दोनों निगलने में तकलीफ होती थी। वह नई मरीज थीं। वहीं जो पुरुष मरीज थे, वे हमारे पुराने मरीज थे। उन्हें पहले जीभ के पिछले भाग (Base of tongue) का कैंसर हो चुका था और लगभग अगस्त 2023 तक उनका इलाज चला था। लगभग 2.5 साल के बाद वे वापस आए थे। विडंबना देखिए, दोनों मरीज आयुर्वेदिक इलाज के चक्कर में फँस गए और बीमारी बहुत ज़्यादा बढ़ा ली। महिला मरीज का तो खाना भी अंदर नहीं जा रहा था, शायद पानी भी बहुत मुश्किल से जा रहा था। पुरुष मरीज को निगलने में तकलीफ के साथ गले में गांठ, नाक से खाना-पानी वापस आना और दर्द भी बहुत ज़्यादा था, तब वे दिखाने आए।
दोनों मरीजों को जीभ के पिछले हिस्से (Base of tongue) और वैलेकुला (Vallecula - गले/Pharynx के पीछे का भाग) का ट्यूमर था। काफी दयनीय और कमजोर स्थिति थी। दोनों मरीजों की जब जाँचें हुईं, तो उसके बाद कीमोथेरेपी (रसायन चिकित्सा) और इम्यूनोथेरेपी का इलाज शुरू हुआ।
इलाज की पहली ही साइकिल (Cycle/श्रृंखला) के बाद महिला मरीज ने बताया कि उन्हें बहुत आराम मिला। हमने उन्हें सही आहार मार्गदर्शिका (Proper Food Guidance) भी दी। कुछ कमजोरी आई थी और एक-दो बार खून (Blood Transfusion) चढ़ाना पड़ा, पर ओवरऑल मरीज को धीरे-धीरे तरल खाना खाने की ताकत और हिम्मत आई। पहले तो वह अपना थूक भी नहीं निगल पाती थीं, उसमें भी सुधार हुआ।
लेकिन जो पुरुष मरीज थे, वे 56 साल के बुजुर्ग थे। उन्हें दर्द ज़्यादा था और समझ की कमी थी, इसलिए उन्हें ज़्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। समस्या यह थी कि मरीज ने आयुर्वेद इलाज दूसरी कीमोथेरेपी के बाद छोड़ा, जब वे गंभीर हालत में भर्ती हुए। तब बहुत समझाने पर बात समझ आई। अब वे 3 से 4 कीमोथेरेपी की श्रृंखला के बाद पूरी तरह ठीक हैं, अभी दवा ले रहे हैं, फॉलो-अप के लिए आते हैं और जाँच भी करवाते हैं। वे ओरल ट्रीटमेंट (Oral treatment) ले रहे हैं पर रेडियोथेरेपी के लिए राजी नहीं हुए।
इस तरह कैंसर मरीजों को इलाज के दौरान सही सलाह, मार्गदर्शन और भावनात्मक सहारे (Emotional support and advice) की बहुत ज़्यादा ज़रूरत होती है।
समय: सोमवार से शनिवार | शाम 5:30 बजे से रात 8:00 बजे तक
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(अस्वीकरण: यह लेख केवल जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या कैंसर के इलाज के लिए अपने योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।)